Wednesday, November 15, 2017

Some Points to Learn

ॐ  

 



जो जन बिजुली , प्रातः काल और ऋषि के सदृश धन के कोष को इकट्ठा करते हैं वे प्रतिष्ठित होते हैं। ऋग्वेद। ५/५९/८। 


Those who collects the treasure just like Dawn, Morning and Spiritual scientists, Rishis, attain grace and fame.


हे मनुष्यों! आप लोग ब्रह्मचर्य आदि से अतिकाल पर्यन्त जीवने वाले योगी पुरुषार्थी होइए। ऋग्वेद। ५/५५/१। 

O Human Beings! By observing Celibacy, become Yogi and Active, Hard Working, who live for a long.

हे मनुष्यों! ब्रह्मचर्य से शरीर और आत्मा के बल को धारण करके और क्रिया कुशलता को जानके जैसे ईश्वर अन्तरिक्ष में सम्पूर्ण पदार्थों को उत्पन्न करता है।  वैसे ही आप लोग अनेक व्यवहारों को सिद्ध कीजिये। ऋग्वेद। ५/५५/२। 

O Human Beings! Attain the strength of soul and body, learning the skill of performance of several kinds, as the God generates, all the materials in the Space. Perform all the tasks similarly.

हे मनुष्यों! आप लोग सूर्य की किरणों के सदृश एक साथ ही पुरुषार्थ के लिए उद्यत हूजिये और जैसे कल्याण करने वालों के पीछे भृत्य जन वर्तमान होते हैं वैसे ही धर्म के पीछे वर्तमान हूजिये।ऋग्वेद। ५/५५/३। 

O Human Beings! Altogether perform your duties just like the rays of the Sun. As the servants, co workers follow the men of Welfare, you should make you present behind the true religion(Dharma, a good and praised work with the pain of performance)  similarly.

विद्वान जन ऐसा उपदेश करें जिससे कि किसी से दान कोई भी नहीं ग्रहण करे वैसे ही माता और पिता से पुत्र आदि भी दान की रूचि न करें।ऋग्वेद। ५/७०/४। 

Scholars must deliver their speeches that no one should accept donation from anyone at all. Similarly Sons etc. must not have any desire to get donation, gifts from their parents.

जो मनुष्य निश्चित धर्म, व्रत और शील को धारण करते हैं वे दृढ सुख से युक्त होते हैं। ऋग्वेद। ५/७२/२। 

The men who follow Dharma, Vrat (Fast, Good Determination) and behavior, modesty, get the firm Pleasures, comforts, delights.

हे मनुष्यों! जैसे अंतरिक्ष में सूर्य और चन्द्रमा प्रकाशित होते हैं वैसे मनुष्यों की बुद्धियों को बढ़ाइये। ऋग्वेद। ५/७१/२। 

O Men! As The Sun and The Moon shine in the Sky, You should improve, gain the Minds(Decision Making powers) of the Others.


आपका 
ब्रह्मचारी अनुभव शर्मा 

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